
x
6 साल की बच्ची से दरिंदगी और हत्या
Delhi दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने छह साल की सौतेली बेटी से बार-बार दुष्कर्म और गला दबाकर उसकी हत्या करने के मामले में दोषी व्यक्ति की दोषसिद्धि बरकरार रखी है। हालांकि, अदालत ने उसे दी गई मौत की सजा को बिना किसी सजा माफी के बाकी प्राकृतिक जीवन तक उम्रकैद में बदल दिया। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने हत्या, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित किया है। कोर्ट ने अपराध को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि बच्ची का उसके अभिभावक ने लंबे समय तक यौन शोषण किया और बाद में अपराध छिपाने के लिए उसकी हत्या कर दी।
पीठ ने कहा कि अपराध की गंभीरता के बावजूद दोषी से जुड़ी परिस्थितियों और उसके सुधार की संभावना को देखते हुए यह ऐसा मामला नहीं है, जिसमें मौत की सजा बरकरार रखी जाए। साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सामान्य उम्रकैद भी पर्याप्त सजा नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट ने आईपीसी की धारा 302 और 376एबी के तहत दी गई मौत की सजा को दोषी के शेष प्राकृतिक जीवन तक बिना सजा माफी वाली उम्रकैद में बदल दिया। अन्य अपराधों के लिए दी गई सजा और जुर्माना बरकरार रखा गया है।
मामला वारिस नाम के व्यक्ति से जुड़ा है। ट्रायल कोर्ट ने उसे दोषी ठहराकर मौत की सजा सुनाई थी। बाद में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भी दोषसिद्धि और मृत्युदंड को बरकरार रखते हुए मामले को 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' श्रेणी में माना था। मामले में बच्ची की मां प्रमुख प्रत्यक्षदर्शी थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार बच्ची की मौत गला दबाने से दम घुटने के कारण हुई थी और डॉक्टर ने चोटों को यौन हमले का संकेत माना था।
Next Story





